10 Amazing Home Remedies You can living happy life with diabetes(10 अद्भुत घरेलू उपचार आप मधुमेह के साथ खुशहाल जीवन जी सकते हैं)


मधुमेह के साथ एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीना संभव है। लाखों मधुमेह रोगी आयुर्वेद के साथ अपने रक्त शर्करा के स्तर का प्रबंधन करते हैं और मधुमेह के समय पर उपचार की उपेक्षा के कारण होने वाली बड़ी स्वास्थ्य जटिलताओं की शुरुआत से बचते हैं। अपने मधुमेह के मूल कारण को समझें, इसे प्रबंधित करें और आयुर्वेद के साथ इसका इलाज करें। आगे स्वास्थ्य समस्याओं के अपने जोखिम को कम करने के लिए सक्रिय कदम उठाएं।

डायबिटीज दो प्रकार की होती हैं। टाइप-1 में अग्नाशय(Pancreas) पर्याप्त मात्रा में जब इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता है, तो ऐसे रोगियों को इंसुलिन देकर शर्करा को चयापचय के योग्य बनाया जाता है। टाइप-2 में अग्नाशय से पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन निकलता तो है, लेकिन उसका सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो पाता। ऐसे रोगियों को खानेवाली दवाएं दी जाती हैं। प्री-डायबीटीज में रक्त में शुगर की मात्रा ज्यादा होती है। पैरों और सांस से आ रही बदबू से ऐसे लोगों की पहचान की जाती है।

आयुर्वेद मधुमेह को एक बीमारी के रूप में नहीं मानता है जिसका इलाज केवल दवा से या आहार आहार द्वारा किया जा सकता है। मधुमेहा को महा रोग (मेजर डिजीज) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, क्योंकि अगर समय पर इलाज नहीं किया जाता है, तो इससे शरीर में कई जटिलताएं हो सकती हैं, जिसमें आंख की समस्या, जोड़ों में दर्द, नपुंसकता, गुर्दे की विफलता, यौन और मूत्र संबंधी समस्याएं, और बहुत कुछ शामिल हैं। मधुमेह एक चयापचय विकार है और इसका उपचार केवल शर्करा के स्तर को नियंत्रित करके नहीं किया जा सकता है। आयुर्वेद में उपचार की सिफारिश की गई – जैसा कि आधुनिक चिकित्सा के खिलाफ है – इसका उद्देश्य शरीर को न केवल चीनी के स्तर को संतुलित करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आगे कोई जटिलता न हो।

HOME REMEDIES(घरेलू उपचार)

⚫दिन में एक बार 2 चम्मच करेले के रस का सेवन करें।

⚫ दिन में दो बार 1 चम्मच मेथी के पाउडर का सेवन पानी के साथ करें।

⚫ दिन में एक बार 2 चम्मच लौकी के रस को एक चम्मच आंवले के रस के साथ मिलकर लें।

⚫ ग्रीन टी भी मधुमेह मे बहुत फायदेमंद मानी जाती है। इसके सेवन से शरीर इन्सुलिन का सही तरह से इस्तेमालकर पाता है।

⚫ के पत्तों में दूध की तुलना में चार गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। मधुमेह में इन पत्तों के सेवन से भोजन के पाचन और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है। इसके नियमित सेवन से भी लाभ प्राप्त होता है।

⚫ एक टमाटर, एक खीरा और एककरेले को मिलाकर जूस निकाल लीजिए। इस जूस को हर रोज सुबह-सुबह खाली पेट लीजिए। इससे डायबिटीज में बहुत फायदा होता है।

⚫ गेहूं के पौधों में रोगनाशक गुण होते हैं। गेहूं के छोटे-छोटे पौधों से रस निकालकर प्रतिदिन सेवन करने से भी मुधमेह नियंत्रण में रहता है।

⚫ शलजम के प्रयोग से भी रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होने लगती है। इसके अतिरिक्त मधुमेह के रोगी को तोरई, लौकी, परवल, पालक, पपीते आदि का प्रयोग भी ज्यादाकरना चाहिए।

⚫ सदाबहार के फूल की कोमल पत्तियाँ चबाकर रस चूसने से रोग से राहत मिलती है। सदाबहार के पत्तों को सुबह खाली पेट चबाएं और दो घूंट पानी पी लें। आधा कप गरम पानी में सदाबहार के तीन-चार ताजे गुलाबी फूल पांच मिनट तक भिगोकर रखें। इसके बाद फूल निकाल दें और यह पानी सुबह खाली पेट पियें।

⚫ दो ग्राम दालचीनी चूर्ण और एक लौंग उबले पानी में डालकर ढककर रख दें। 15 मिनट बाद इस पानी को पिएं। रोजाना दो बार सुबह-शाम ऐसा करने से काफी तेजी से डायबिटीज पर नियंत्रण किया जा सकता है।

मधुमेह या मधुमेहा आयुर्वेद में वर्णित 5 प्रमुख बीमारियों में से एक है और भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यह चयापचय संबंधी विकार ऊतक क्षति का कारण बनता है, इसलिए भले ही रक्त शर्करा के स्तर को दवाओं के नियंत्रण में रखा जाए, यह बाद में आंखों, गुर्दे या अन्य महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।

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